गठिया रोग एंव निवारण

गठिया रोग - एंव निवारण गठिया किसे कहते है - गठिया को सामान्य भाषा में जोडो़ की सूजन कहते है। प्रायः गठिया रोग में जोड़ नही सूजते है,जोडो़ के उपर लाइनिगं या परत सूज जाती है। जब जोडो़ं में सूजन दृष्टिगोचर होती है अर्थात दर्द होता है,और वह लचीले न रहकर सख्त हो जाते है ,तो इसे गठिया कहते है । जोडो़ का दर्द गठिया के अलावा अन्य कारणों से भी होता है। जैसे ओस्टियोंर्थाइटिस रोगों में शरीर की बहुत छोटी-छोटी हड्डियों में सूजन आने से मांसपैशिया खिच जाने से अथवा नसें एक दूसरे पर चढ़ जाने से भी जोडो़ में सूजन आकर दर्द होना । अतः जोडो़ के दर्द का निदान करते समय पहले इस बात की पूर्णतः जानकारी कर लेनी चाहिऐ, कि दर्द किसी और कारण से तो नही हैं । यदि कोई विशेष कोई अनयकारण दृष्टिगोचर न हो तो इस रोग के पीछे गठिया रोग हो सकता है। * गठिया क्यों होता है - गठिया एक प्रकार का आमवात रोग है, वात रोग में सर्वाधिक विकार गठिया का होता है , जो ठंण्ड का प्रकोप जोडो़ के मध्य वायु प्रवेश कर जाने से गठिया रोग हो सकता है। गठिया रोग प्रायः अनियमित दिनचर्या ,गरिष्ठ भोजन व खट्टा-बादी भोजन करना, अधिकांस्ता खडे़ होकर पानी पीना,योगाभ्यास न करना भी बहुत बडा़ कारण होता है ।साथ ही शारीरिक संक्रमण , अथवा शरीर में यूरिक एसिड मात्रा का अत्याधिक बढ़ना भी गठिया का कारण बन जाता है । * गठिया की पहचान कैसे करें - गठिया रोग है या नही वाह्य रूप से कोई विशिष्ट परीक्षण नही है ,फिर प्रथम द्वष्टि से पैरो में,हड्डियों के जोडो़ में सूजन व दर्द का बना रहना,चलने में घुटनो के मध्य से रगड़ की आवाज के साथ दर्द , साथ ही रक्त परीक्षण में सीरमआर.ए , यूरिक एसिड , सी आर पी आदि का बढ़ना भी गठिया रोग को इंगित करता है ।

* गठिया कारण एंव उपाऐं- गठिया रोग बृद्धो का रोग नही है यह स्त्री/पुरूष लड़के/लड़कियां, किसी को भी हो सकता है । विश्व में लगभग लोग गठिया से पीड़ित है,अर्थात प्रति दस व्यक्ति में एक को गठिया है । गठिया शरीर में धीरे-धीरे पनपने वाला रोग है , पर इस रोग की पकड़ दिन पर दिन बढ़ती रहती है,जिससे चलने फिरने में परेशानी होती रहती है, और धीरे-धीरे जोडो़ के मध्य लिंगामेन्ट में सूजन के साथ उसके टिस्यू क्षतिग्रस्त होने लगते है,जिसके कारण शरीर के दूसरे अगं भी प्रभावित हो जाते है । गठिया का दर्द कम या ज्यादा हो सकता है । लेकिन यह दर्द दिन प्रति दिन गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है ।क्योकि गठिया रोग का नियन्त्रण आसान नही है ।इसका दर्द कम किया जा सकता है , तथा जोडो़ के मध्य लिगांमेनट की क्षति को अयुर्वेदिक औषधियों द्बारा बचाया भी जा सकता है । * गठिया को नियन्त्रित रखने के लिऐ दर्द निवारक दवाओं व (स्टीराइड) दवाओं का उपयोग नही करना चाहिऐं। दर्द निवारक दवाओं से आराम तो अवश्य मिलता है ,परन्तु कुछ समय पश्चात शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ने लगता है ,जिससे आपके शरीर के महत्व पूर्ण अंग क्षतिग्रस्त हो जाते है ।जैसे लीवर,किडनी रोग तथा खून की कमी होने लगती है ।

* गठिया रोग अयुर्वेद चिकित्सा- अयुर्वेद पद्धति में जडी़ बूटियों द्बारा प्राचीन एंव असाध्य रोग आमवात ( गठियां ) को निम्न अयुर्वेदिक औषधियों द्धारा आराम दिलाया जा सकता है ।जैसे-अश्वगंधा,चोपचीनी,शलाई गुग्गुल,शुद्ध गुग्गुल,शुद्ध शीलाजीत,गिलोय,पुनर्नवा जड़,पिपरमूल,इन्द्राणी मूल , शल्लाकी गुग्गुल, योगराज,कुलंजन आदि जड़ी बूटियों द्बारा गठिया रोग मे आराम दिलाया जा सकता है । गठिया रोग में आराम मिल जाने के पश्चात योगाभ्यास व व्यायाम करते रहना चाहिऐ । तथा गठिया के रोगी को खान-पान,पथ्य- अपथ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिऐ । और अधिक जानकारी के लिऐ डा0 राव समिति के चिकित्सक/वैधौ से निः शुल्क परामर्श ले । धन्यवाद ...।

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